कोटा में छात्र आत्महत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट की गंभीर चिंता, राज्य सरकार से मांगा जवाब

Supreme Court expresses serious concern over student suicides in Kota, seeks response from state government

नई दिल्ली: राजस्थान के कोटा शहर में छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गहरी चिंता जाहिर की। अदालत ने इसे ‘गंभीर स्थिति’ करार देते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सवाल उठाया, “एक राज्य के रूप में आप क्या कदम उठा रहे हैं? ये आत्महत्याएं सिर्फ कोटा में ही क्यों हो रही हैं? क्या सरकार ने इस पर कभी गहराई से विचार नहीं किया?”

कोर्ट को बताया गया कि साल 2024 में अब तक कोटा में छात्रों की आत्महत्या के 14 मामले दर्ज हुए हैं, जिससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहराते संकट की स्थिति उजागर होती है।

राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। कोर्ट इस दौरान दो आत्महत्या के मामलों पर सुनवाई कर रहा था—एक मामला IIT खड़गपुर के 22 वर्षीय छात्र की आत्महत्या से जुड़ा है, जो 4 मई को अपने हॉस्टल में फांसी पर लटका मिला था, वहीं दूसरा मामला नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की कोटा में आत्महत्या से जुड़ा है।

पीठ ने IIT छात्र की आत्महत्या में एफआईआर दर्ज करने में चार दिन की देरी पर कड़ी नाराजगी जताई और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, “इन मामलों को हल्के में न लें, ये अत्यंत गंभीर विषय हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 24 मार्च 2024 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ती आत्महत्याओं के मद्देनजर एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स के गठन की सिफारिश की गई थी। उद्देश्य था—छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझना और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस नीति बनाना।

पीठ ने शुक्रवार को दोहराया कि आत्महत्या जैसे मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। अदालत में उपस्थित पुलिस अधिकारी से पूछे गए सवाल पर जब देरी का संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कोर्ट ने कहा, “हम इस मामले में कड़ा रुख भी अपना सकते थे। संबंधित थाना प्रभारी पर अवमानना का मुकदमा चलाया जा सकता था।”

रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि IIT खड़गपुर के अधिकारियों ने आत्महत्या की सूचना समय पर पुलिस को दी थी, फिर भी एफआईआर में देरी हुई। कोर्ट पुलिस और संस्थान दोनों के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट रहा और कानून के अनुसार त्वरित जांच जारी रखने का निर्देश दिया।

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