नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दावा किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में भारी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि एक ही विधानसभा क्षेत्र में 12 जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित कर दिया गया है।
इस पर चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने जवाब देते हुए कहा कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में “कुछ त्रुटियां होना स्वाभाविक” है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभी केवल ड्राफ्ट सूची है और इन गलतियों को सुधारा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे. बागची की पीठ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में सभी तथ्यों और आंकड़ों के साथ पूरी तैयारी के साथ पेश हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया से पहले और बाद के मतदाताओं की संख्या, मृतक मतदाताओं की जानकारी और अन्य जरूरी विवरणों पर आयोग से सवाल किए जाएंगे।
गौरतलब है कि राजद सांसद मनोज झा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि इस प्रक्रिया से लाखों पात्र मतदाताओं को सूची से हटाया जा सकता है। विपक्षी दलों – राजद, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) और वाम दलों – ने संयुक्त रूप से इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में उठाया है।
बता दें कि बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 1 अगस्त को प्रकाशित की गई थी, जबकि अंतिम सूची 30 सितंबर को जारी की जानी है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में पुनरीक्षण प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य ‘अयोग्य मतदाताओं को हटाकर’ चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखना है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संकेत दे दिया है कि अगर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, तो वह हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा।