ट्रंप प्रशासन ने बाइडन युग के करीब 30 करियर राजदूतों को वापस बुलाया, ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को मजबूत करने की तैयारी

The Trump administration recalled nearly 30 career ambassadors appointed during the Biden era, preparing to reinforce its "America First" policy.

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में विदेश नीति को ‘अमेरिका फर्स्ट’ के अनुरूप ढालने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में तैनात करीब 30 करियर राजदूतों और वरिष्ठ दूतावास अधिकारियों को उनके पदों से वापस बुलाने का फैसला किया है। ये सभी राजनयिक पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में नियुक्त किए गए थे और ट्रंप के सत्ता में आने के शुरुआती महीनों में अपने पदों पर बने हुए थे।

इस फैसले को ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि विदेश नीति में व्यापक बदलाव के तहत इन राजदूतों को हटाया जा रहा है, ताकि उनकी जगह ऐसे अधिकारियों को लगाया जा सके जो पूरी तरह राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण का समर्थन करें। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बदलाव को “किसी भी प्रशासन में सामान्य प्रक्रिया” बताया है। विभाग के बयान में कहा गया है कि राजदूत राष्ट्रपति के व्यक्तिगत प्रतिनिधि होते हैं और यह राष्ट्रपति का अधिकार है कि वे ऐसे व्यक्ति नियुक्त करें जो ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा को आगे बढ़ाएं।

विदेश विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित राजदूतों को पिछले सप्ताह से वॉशिंगटन से औपचारिक नोटिस मिलने शुरू हो गए थे, जिसमें जनवरी में उनके पद की समाप्ति की सूचना दी गई। सबसे ज्यादा प्रभाव अफ्रीका महाद्वीप पर पड़ा है, जहां 13 देशों (बुरुंडी, कैमरून, केप वर्डे, गैबॉन, कोट डी आइवर, मेडागास्कर, मॉरीशस, नाइजर, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल, सोमालिया और युगांडा) के राजदूतों को वापस बुलाया जा रहा है। इसके अलावा यूरोप के चार देशों (आर्मेनिया, मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो और स्लोवाकिया), मध्य पूर्व के दो (अल्जीरिया और मिस्र), दक्षिण एवं मध्य एशिया के दो (नेपाल और श्रीलंका) तथा पश्चिमी गोलार्ध के दो देशों (ग्वाटेमाला और सूरीनाम) के राजदूत भी प्रभावित हैं।

हालांकि अमेरिकी राजदूत आमतौर पर राष्ट्रपति की मर्जी से काम करते हैं और उनका कार्यकाल तीन से चार साल का होता है, लेकिन इस फैसले से प्रभावित राजनयिकों की विदेश सेवा में नौकरी खत्म नहीं होगी। वे वॉशिंगटन लौटकर विदेश विभाग में अन्य जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं। यह कदम करियर डिप्लोमैट्स (स्थायी विदेश सेवा अधिकारी) पर असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर नए राष्ट्रपति केवल राजनीतिक नियुक्तियों को बदलते हैं, जबकि करियर अधिकारियों को जारी रहने दिया जाता है।

यह बदलाव कुछ विधायकियों और अमेरिकी डिप्लोमैट्स के यूनियन से चिंता पैदा कर रहा है, लेकिन प्रशासन इसे अपनी विदेश नीति को मजबूत बनाने की रणनीति का हिस्सा बता रहा है।

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