नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गुस्साए लोगों ने सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बना लिया। इस घटना पर Supreme Court of India ने गंभीर चिंता जताते हुए इसे बेहद निंदनीय करार दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना मालदा के कालियाचक इलाके में हुई, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। बंधक बनाए गए अधिकारियों में तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। बताया गया कि उन्हें दोपहर से लेकर देर रात तक रोके रखा गया। रात करीब 1 बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीम मौके पर पहुंची और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची से कई लोगों के नाम हटाए जाने के बाद इलाके में विरोध भड़क गया। इसी दौरान आक्रोशित भीड़ ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को घेर लिया और उन्हें जाने नहीं दिया। ये अधिकारी चुनाव से पहले मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के कार्य में जुटे थे।
जब पुलिस अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल रही थी, तब प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहनों पर हमला करने की कोशिश की। कुछ वीडियो में गाड़ियों के शीशे टूटे हुए और पत्थरबाजी के दृश्य भी सामने आए। हालांकि, पुलिस ने हालात पर काबू पाते हुए सभी अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया।
घटना के बाद Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। वहीं, केंद्रीय मंत्री Sukanta Majumdar ने आरोप लगाया कि यह घटना सत्ताधारी दल के भड़काऊ बयानों का परिणाम है। उनका कहना है कि SIR प्रक्रिया पूरे देश में चल रही है, लेकिन इस तरह का विरोध केवल पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है।
दूसरी ओर, Trinamool Congress के नेता Kunal Ghosh ने कहा कि उनकी पार्टी कानून को हाथ में लेने में विश्वास नहीं करती। उन्होंने इस घटना की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर डालते हुए कहा कि पार्टी केवल मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रही है।