वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा व्यापारिक फैसला लेते हुए कहा है कि अमेरिका जल्द ही 150 से अधिक देशों पर ‘यूनिफाइड टैरिफ रेट’ (統一 शुल्क दर) लागू करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन देशों को नई टैरिफ दरों की जानकारी देने के लिए पत्र भेजे जाएंगे। इस फैसले का सीधा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
इस बीच ट्रंप ने भारत को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिकी उत्पादों को जल्द ही भारतीय बाजारों में पहुंच मिल सकती है। उन्होंने संकेत दिया है कि इंडोनेशिया मॉडल वाली ट्रेड डील भारत के साथ भी हो सकती है, जिसमें अमेरिकी उत्पादों पर भारत में जीरो टैरिफ लगाया जाएगा।
1 अगस्त से लागू होंगी नई टैरिफ दरें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सरकार पहले ही करीब दो दर्जन देशों, जिनमें यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं, को 1 अगस्त से लागू होने वाली टैरिफ दरों की सूचना दे चुकी है। इसके बाद अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों के साथ अनुकूल शर्तों के लिए बातचीत तेज हो गई है।
ट्रंप ने हाल ही में इंडोनेशिया पर 19% टैरिफ लागू किया है। 1 अगस्त से इंडोनेशिया से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर यह शुल्क लगेगा, जबकि अमेरिकी उत्पादों पर इंडोनेशिया में कोई टैरिफ नहीं देना होगा। ट्रंप ने कहा, “हमने कई बेहतरीन देशों के साथ समझौते किए हैं और एक और समझौता शायद भारत के साथ होने वाला है। जब मैं लेटर भेजूंगा, तो समझौता हो जाएगा।”
भारत के साथ बातचीत जारी
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने यह तय किया है कि 1 अगस्त से अधिकांश आयातों पर शुल्क बढ़ाया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि जो देश समय रहते अमेरिका से समझौता नहीं करेंगे, उन्हें अधिक शुल्क का सामना करना होगा।
ट्रंप ने पहले 2 अप्रैल को भारत समेत 100 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाया था, जिसमें भारत पर 26% टैरिफ लगाया गया था, जिसे बाद में 90 दिनों के लिए टाल दिया गया।
भारत की स्थिति स्पष्ट
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार चाहती है कि अमेरिका भारत के लिए टैरिफ रेट 10% से नीचे रखे। इसके बदले भारत गैर-कृषि क्षेत्रों में रियायतें देने को तैयार है। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को विदेशी कंपनियों के लिए नहीं खोलेगा।
भारत ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यदि अमेरिका टैक्स कम करता है, तो भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर टैक्स पूरी तरह खत्म कर देगा। इसके अलावा, भारत ने बोइंग से और विमान खरीदने की संभावना भी जताई है और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार देने की पेशकश की है।
निष्कर्ष
अमेरिका की यह नीति वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित कर सकती है। भारत और अमेरिका के बीच संभावित समझौता भविष्य की व्यापारिक रणनीतियों को नया आकार दे सकता है। अब नजरें इस पर हैं कि आगामी हफ्तों में भारत और अमेरिका के बीच यह प्रस्तावित डील किस दिशा में जाती है।