Allahabad High Court ने एक अहम मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अवैध गिरफ्तारी पर Uttar Pradesh सरकार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला उन्नाव जिले के इमाम थाना क्षेत्र का है, जहां मनोज कुमार नामक युवक को बिना गिरफ्तारी का कारण बताए करीब तीन महीने तक जेल में रखा गया।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस ने 27 जनवरी 2026 को मनोज कुमार को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। हैरानी की बात यह रही कि न तो युवक को और न ही अदालत को यह बताया गया कि उसे किस आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हेबियस कॉर्पस) के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस Pramod Kumar Srivastava और जस्टिस Abdul Moin की खंडपीठ ने सुनवाई की।
बिना कारण 92 दिन तक जेल में बंद
अदालत ने पाया कि मनोज कुमार को 27 जनवरी से 29 अप्रैल 2026 तक कुल 92 दिनों तक जेल में रखा गया, जबकि पुलिस गिरफ्तारी का कोई स्पष्ट कारण पेश नहीं कर सकी। कानून के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य होता है। कोर्ट ने इसे व्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने अपर मुख्य सचिव (गृह) द्वारा दाखिल हलफनामे पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि इतनी गंभीर लापरवाही पर राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “जब वरिष्ठ अधिकारियों की यह स्थिति है, तो अधीनस्थ अधिकारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है?”
10 लाख मुआवजा देने का आदेश
हाई कोर्ट ने युवक की तत्काल रिहाई का आदेश देते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर 10 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार पहले यह राशि अपने कोष से अदा करे और बाद में जिम्मेदार पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी वसूली करे।
अदालत का यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।