बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब एलोपैथिक के साथ आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी मिलेंगी

Bihar government hospitals will now offer allopathic and ayurvedic medicines along with homeopathic medicines.

बिहार: सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में अहम फैसला लिया है। अब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को एलोपैथिक दवाओं के साथ-साथ आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। यह कदम पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और मरीजों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

आयुष चिकित्सकों की तैनाती के बाद लिया गया निर्णय
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति के बाद यह महसूस किया गया कि जिन मरीजों का इलाज आयुर्वेद या होम्योपैथिक पद्धति से किया जा रहा है, उन्हें संबंधित दवाएं भी सरकारी स्तर पर मिलनी चाहिए। इसी के तहत अस्पतालों में इन दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

खरीद और आपूर्ति की जिम्मेदारी निगम को
दवाओं की खरीद, भंडारण और वितरण की जिम्मेदारी बिहार स्वास्थ्य सेवाएं आधारभूत संरचना निगम को सौंपी गई है। निगम एक समन्वित आपूर्ति प्रणाली तैयार कर रहा है, ताकि किसी स्तर पर दवाओं की कमी न हो। गुणवत्ता और समय पर उपलब्धता के लिए विशेष निगरानी तंत्र भी लागू किया जाएगा।

294 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी मिलेगी सुविधा
राज्य के सभी जिलों में संचालित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पहले चरण में आयुष डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही 294 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन केंद्रों को प्राथमिक स्तर पर समग्र स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

सरकार का मानना है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मरीज वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता देते हैं, खासकर पुरानी बीमारियों, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं में।

जल्द शुरू होगी आपूर्ति
अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं की सूची तैयार की जा रही है और आवश्यक अनुमोदन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही चयनित अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।

सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मजबूती मिलेगी और मरीजों को एक ही छत के नीचे विभिन्न उपचार विकल्प मिल सकेंगे, जिससे राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और सशक्त होगी।

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