बिहार में लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम के तहत लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर अब तक 2 करोड़ 37 लाख 58 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जा चुका है। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी सामान्य प्रशासन विभाग की देखरेख में बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन द्वारा की जा रही है।
99.5% सेवाओं का समय पर निष्पादन
विभागीय जानकारी के अनुसार, शिथिल कर्मियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, क्योंकि राज्य में 99.5 प्रतिशत सेवाओं का निष्पादन निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जा रहा है। हालांकि आईटी आधारित प्रणाली लागू होने के बावजूद बिचौलियों की सक्रियता के मामले सामने आए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 355 बिचौलियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
2011 से लागू है अधिनियम, 153 सेवाएं अधिसूचित
वर्ष 2011 से लागू इस अधिनियम के तहत कुल 153 सेवाएं अधिसूचित हैं। कानून के तहत यह तय है कि आवेदन मिलने के कितने दिनों के भीतर संबंधित सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
15 अगस्त 2011 से 6 जनवरी 2026 तक सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित सेवाओं के लिए 40,53,46,043 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 40,41,14,682 आवेदनों का निष्पादन किया गया, जो 99.70 प्रतिशत है।
दाखिल-खारिज मामलों में 95% से अधिक निपटारा
जमीन दाखिल-खारिज से जुड़ी सेवाएं भी इसी अधिनियम के अंतर्गत आती हैं। अगस्त 2011 से जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक दाखिल-खारिज के 1,04,63,077 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 99,45,698 का निष्पादन किया गया। यह 95.06 प्रतिशत है।
अन्य प्रमुख सेवाओं का निष्पादन प्रतिशत
- भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र: 99.99%
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 97.87%
- राशन कार्ड: 98.13%
- आचरण प्रमाण पत्र: 99.38%
- निबंधन सेवाएं: 99.97%
- अन्य सेवाएं: 99.96%
51.20 करोड़ आवेदनों का निपटारा
अगस्त 2011 से जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक कुल 51.46 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 51.20 करोड़ मामलों में सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत आवेदन ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हो रहे हैं, जो डिजिटल व्यवस्था की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।