US-ईरान युद्ध का असर: तेल महंगाई से FY27 में India Inc की कमाई पर दबाव बढ़ने की आशंका

Impact of US-Iran Conflict: Rising Oil Prices Feared to Intensify Pressure on India Inc's Earnings in FY27

नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत में महंगाई और कॉरपोरेट कमाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती इनपुट लागत FY27 में India Inc के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है और कई कंपनियों की आय अनुमान (earnings estimates) में कटौती देखने को मिल सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि असर सभी सेक्टरों पर समान नहीं होगा और मजबूत ब्रांड व प्राइसिंग पावर वाली कंपनियां लागत का कुछ बोझ ग्राहकों पर डालकर अपने मुनाफे को बचा सकती हैं।

तेल की कीमतों में 55% तक उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 55% की तेजी दर्ज की गई। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बना हुआ है।

इस बीच, भारत सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹7 से अधिक की बढ़ोतरी ने महंगाई की चिंता और बढ़ा दी है।

RBI के लिए बढ़ सकती है चुनौती

ब्रोकरेज फर्म JM Financial Services के मुताबिक, यदि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर लंबे समय तक बना रहा तो महंगाई की उम्मीदें अनियंत्रित हो सकती हैं।

अप्रैल 2026 के मैन्युफैक्चरिंग PMI सर्वे में ऊर्जा, खाद्य, ईंधन, गैस, स्टील, प्लास्टिक, रबर और परिवहन लागत में बढ़ते दबाव के संकेत मिले हैं।

RBI ने FY27 के लिए औसत महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन जून 2026 की MPC बैठक में इसे बढ़ाया जा सकता है।

एक PTI रिपोर्ट के अनुसार, कई अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि जून तक खुदरा महंगाई 5% तक पहुंच सकती है।

WPI 42 महीने के उच्च स्तर पर

अप्रैल में थोक महंगाई (WPI Inflation) बढ़कर 8.3% पर पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों का उच्चतम स्तर है।

हालांकि, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई अपेक्षाकृत कम बढ़कर 3.48% रही। मई का CPI डेटा 12 जून को जारी होगा।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती तेल कीमतों का सबसे ज्यादा असर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जिनकी निर्भरता कच्चे माल और ऊर्जा लागत पर अधिक है। इनमें शामिल हैं:

  1. पेंट्स
  2. केमिकल्स
  3. एविएशन
  4. सीमेंट
  5. FMCG और उपभोक्ता सामान

Master Capital Services के रिसर्च प्रमुख डॉ. रवि सिंह ने कहा कि ऊंचे कच्चे तेल के दाम केवल ईंधन लागत ही नहीं बढ़ाते, बल्कि परिवहन, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेटिंग खर्च पर भी असर डालते हैं।

Nifty EPS अनुमान पर खतरा

Motilal Oswal Financial Services के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, FY27 के लिए Nifty EPS ग्रोथ का अनुमान करीब 18% रखा गया था, जो काफी कम क्रूड ऑयल कीमतों के आधार पर तैयार किया गया था।

अब यदि ब्रेंट क्रूड 107-111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो इन अनुमानों में कटौती की संभावना बढ़ सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार, हर 10 डॉलर प्रति बैरल की स्थायी बढ़ोतरी Nifty कंपनियों के कुल मार्जिन पर 40-60 बेसिस प्वाइंट तक दबाव डाल सकती है।

बाजार पर भी बढ़ सकता है दबाव

कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली और तेल कीमतों में तेजी पहले से ही भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रही है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार ने लंबी गिरावट के बाद एक मजबूत आधार बना लिया है और फिलहाल बड़ी गिरावट की संभावना कम है।

Intrinsic Value के संस्थापक निखिल गंगिल के मुताबिक, महंगाई के दौर में कंपनियों की नाममात्र आय (Nominal Revenue) अक्सर बढ़ती है, इसलिए व्यापक स्तर पर मंदी की आशंका अभी जल्दबाजी होगी।

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