नई दिल्ली: पहुचगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने न केवल पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, बल्कि अब उन देशों के खिलाफ भी एक्शन मोड में आ गया है जो पाकिस्तान और चीन के करीबी माने जाते हैं। इसी कड़ी में अब बांग्लादेश का नाम भी जुड़ गया है। भारत ने बांग्लादेश पर बड़ी आर्थिक कार्रवाई करते हुए उसके साथ ज़मीनी व्यापार (लैंड पोर्ट्स) पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है।
इस फैसले का बांग्लादेश पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे उसे करीब 770 मिलियन डॉलर (9,367 करोड़ बांग्लादेशी टका) का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। लैंड पोर्ट्स बंद होने के चलते भारत-बांग्लादेश सीमा पर सैकड़ों ट्रक सामान के साथ खड़े हैं और जमीनी बंदरगाहों पर भारी जाम की स्थिति बन गई है।
चीन में बांग्लादेशी प्रतिनिधि की टिप्पणी बनी वजह
यह सख्ती उस वक्त आई जब हाल ही में चीन में बांग्लादेश के एक प्रतिनिधि मोहम्मद युनूस ने भारत विरोधी बयान दिए। इसके बाद भारत सरकार ने बांग्लादेश को दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा 9 अप्रैल 2025 को वापस ले ली। इसी सुविधा के तहत बांग्लादेश, भारत के बंदरगाहों और दिल्ली एयरपोर्ट के जरिए मिडल ईस्ट और यूरोप को सामान निर्यात करता था।
किन प्रोडक्ट्स पर लगी पाबंदी?
भारत ने अब रेडीमेड गारमेंट्स, प्रोसेस्ड फूड्स और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स जैसे बांग्लादेशी सामानों के लिए लैंड पोर्ट्स को पूरी तरह बंद कर दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के नए आदेश के मुताबिक, अब इन उत्पादों का आयात केवल दो समुद्री बंदरगाहों – कोलकाता और न्हावा शेवा (महाराष्ट्र) – के जरिए ही संभव होगा।
बांग्लादेश को होगा भारी नुकसान
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इस कदम से बांग्लादेश को जबरदस्त आर्थिक झटका लगेगा। अब तक भारत-बांग्लादेश के बीच होने वाले 93% व्यापार लैंड पोर्ट्स के माध्यम से होता था। बंदरगाहों के बंद होने से एक्सपोर्ट की लागत बढ़ेगी, डिलीवरी टाइम भी ज्यादा होगा और मार्केट कॉम्पिटिटिवनेस में गिरावट आएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश से भारत को भेजे जाने वाले रेडीमेड गारमेंट्स की सालाना वैल्यू लगभग 618 मिलियन डॉलर है। अब यह व्यापार सिर्फ दो समुद्री बंदरगाहों के जरिए ही संभव होगा, जिससे बांग्लादेश की निर्यात अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।