हाथरस भगदड़ मामले में न्यायिक आयोग ने यूपी विधानसभा में पेश की रिपोर्ट, लापरवाही और घातक मिस मैनेजमेंट की बात कही

Judicial Commission presented report in UP Assembly on Hathras stampede case, said negligence and fatal mismanagement

हाथरस में पिछले साल मची भगदड़ को लेकर गुरुवार (5 मार्च) को न्यायिक आयोग ने यूपी विधानसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस भगदड़ का कारण अधिक भीड़, आयोजकों की खराब प्रबंधन क्षमता और पुलिस तथा प्रशासन की लापरवाही है। यह भगदड़ 2 जुलाई 2024 को सिकंदराराऊ के फुलराई गांव में कथावाचक नारायण साकार के प्रवचन के बाद मची थी, जिसमें 121 लोगों की जान चली गई थी। इनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे।

आयोजन में भीड़ से जुड़ी लापरवाही और पुलिस प्रशासन की भूमिका
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सत्संग में 80,000 लोगों के शामिल होने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन वास्तविक संख्या 2.5 से 3 लाख के आसपास थी। प्रशासन ने बिना कोई जांच किए इस आयोजन की अनुमति दे दी थी। न्यायिक आयोग के पैनल ने रिपोर्ट पेश करते हुए यह भी कहा कि इस मामले में आपराधिक साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और इस घटना की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की सिफारिश की है।

भगदड़ के कारण और स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में 80,000 लोगों की आने की संभावना थी, लेकिन वहां लगभग ढाई से तीन लाख लोग पहुंच गए थे। जब प्रवचन समाप्त हुआ, तो आयोजकों ने पूरी भीड़ को एक साथ छोड़ दिया, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। न्यायिक आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बृजेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में गठित आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आयोजकों द्वारा बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कोई तैयारी नहीं की गई थी। अधिक भीड़ के कारण लोग पंडाल से बाहर तक फैल गए, जिससे हजारों लोग भीषण गर्मी और उमस में फंसे रहे। पंखे और कूलिंग सिस्टम केवल मंच तक ही सीमित थे, जबकि पानी की सुविधा भी अपर्याप्त थी। इससे घंटों बैठे लोग बेचैन हो गए थे।

फिसलन और असुरक्षित स्थिति ने बढ़ाई भगदड़ की स्थिति
आयोग ने आगे कहा कि जैसे ही कार्यक्रम समाप्त हुआ, लोग अचानक बाहर की तरफ उमड़ पड़े, जिससे ढलान वाले रास्ते पर भगदड़ मच गई। वहां कीचड़ और पानी फैला हुआ था, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी कारणों के कारण पूरा क्षेत्र उच्च जोखिम वाला बन गया, जहां कई लोग अपना संतुलन खो बैठे और भीड़ से बचने के प्रयास में कुचले गए।

कथावाचक को मिली क्लीन चीट
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि घटना के बाद स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में कथावाचक सूरजपाल (नारायण साकार) को आरोपी नहीं बनाया गया था। इस दौरान आयोजन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और अन्य लापरवाहियों की भी पुष्टि की गई है।

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