महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री धनंजय मुंडे ने बीड के सरपंच की हत्या मामले में विवाद के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मुंडे ने अपने निजी सचिव प्रशांत भामरे और विशेष कार्य अधिकारी प्रशांत जोशी के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपना इस्तीफा सौंपा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज्य विधानमंडल परिसर में घोषणा की कि मुंडे को मंत्री पद से मुक्त कर दिया गया है, और उनका इस्तीफा अब आगे की प्रक्रिया के लिए राज्यपाल को भेजा गया है।
इस्तीफा देने का निर्णय बैठक में लिया गया
धनंजय मुंडे का इस्तीफा उस समय आया जब उनके करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड को दिसंबर 2024 में बीड के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मास्टरमाइंड के रूप में नामित किया गया था। मुंडे बीड के परली विधानसभा क्षेत्र के विधायक और बीड जिले के संरक्षक मंत्री थे। इस्तीफे की मांग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बीच हुई बैठक के बाद की गई थी। अजित पवार ने मुख्यमंत्री से बात करने के बाद मुंडे के इस्तीफे पर एक अलग बैठक भी की थी। सूत्रों के अनुसार, फडणवीस ने अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल को पत्र लिखकर मुंडे से इस्तीफा देने को कहा था।
हत्या से पहले की क्रूरता का हुआ खुलासा
संतोष देशमुख की हत्या के मामले में सामने आई तस्वीरें और चार्जशीट की जानकारी ने विपक्ष की इस्तीफे की मांग को और तेज कर दिया था। इन तस्वीरों और चार्जशीट में हत्या से पहले की गई क्रूरता का विवरण सामने आया। बीड जिले के मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख को 9 दिसंबर 2024 को कथित तौर पर जबरन वसूली के प्रयास को रोकने के दौरान अगवा किया गया और प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
अब तक सात गिरफ्तार
सीआईडी ने 27 फरवरी को देशमुख की हत्या और उससे जुड़े दो अन्य मामलों में 1,200 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। बीड के केज थाना क्षेत्र में सरपंच की हत्या, अवाडा कंपनी से पैसे ऐंठने की कोशिश और कंपनी के सुरक्षा गार्ड पर हमले के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी फरार है।