नई दिल्ली: गुजरात सरकार ने बुधवार को ‘गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी), 2026’ विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया है। इस कदम के साथ राज्य यूसीसी लागू करने की दिशा में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। विधेयक के पारित होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में धर्म, जाति या पंथ के आधार पर अलग-अलग कानूनों की जगह एक समान कानून लागू होगा। सरकार का कहना है कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी।
⚖️ हलाला प्रथा पर सख्ती, सजा का प्रावधान
विधेयक में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। खास तौर पर ‘हलाला’ प्रथा पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। नए कानून के तहत तलाक के बाद कोई भी दंपति बिना शर्त दोबारा विवाह कर सकता है, जिसमें पूर्व पति-पत्नी का पुनर्विवाह भी शामिल है। यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे तीन साल तक की सजा या एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बेहतर सुरक्षा होगी।
💍 विवाह और लिव-इन संबंधों के लिए नए नियम
विधेयक में वैध विवाह के लिए स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं। इसके तहत एक से अधिक विवाह (द्विविवाह) पर प्रतिबंध रहेगा। पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है, जिससे ऐसे संबंधों को कानूनी मान्यता और सुरक्षा मिल सके।
🗓️ 25 मार्च को पारित होने की संभावना
राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपी थी, जिसके बाद यह विधेयक पेश किया गया। विधानसभा में इस पर 24 मार्च को चर्चा प्रस्तावित है, जबकि 25 मार्च को बजट सत्र के अंतिम दिन इसे पारित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
🗳️ राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
यूसीसी विधेयक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होने की उम्मीद है। समर्थक इसे समानता और आधुनिक कानून व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे विभिन्न समुदायों की परंपराओं में हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं।