मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘हस्तक्षेप’ भरी भूमिका और संघर्षविराम की घोषणा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।
सामना में लिखा गया है, “भारत एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र है। किसी भी विदेशी राष्ट्र को हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, लेकिन ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष में दखल दिया और भारत ने उनका युद्धविराम प्रस्ताव मान लिया।” सवाल उठाया गया कि भारत की सेना और जनता को इस फैसले की जानकारी तक नहीं थी, तो ट्रंप को यह अधिकार किसने दिया?
संपादकीय में 1971 के भारत-पाक युद्ध और शिमला समझौते की याद दिलाते हुए कहा गया कि उस समझौते के अनुसार किसी तीसरे देश को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। लेकिन अब, भारत के प्रधानमंत्री खुद उस समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की सराहना करते हुए सामना ने लिखा कि सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया, लेकिन 26 निर्दोषों की हत्या करने वाले छह आतंकियों का कोई अता-पता नहीं है। ट्रंप की पहल से जो युद्धविराम हुआ, उसने जनता के बीच और भी ज्यादा सवाल खड़े कर दिए हैं।
सामना में शहीद हुए जवानों का जिक्र करते हुए 23 वर्षीय मुरली नायक और दिनेश शर्मा को श्रद्धांजलि दी गई और कहा गया कि देश की असली लड़ाई ये जवान लड़ रहे हैं, न कि वे लोग जो टीवी चैनलों पर युद्ध का प्रचार कर रहे हैं। मुरली नायक के पिता के दर्द और गर्व को भी संपादकीय ने संवेदनशीलता से पेश किया।
अंत में, ट्रंप की नीयत पर तीखे सवाल उठाते हुए सामना ने लिखा – “ट्रंप कोई गांधी, मंडेला या लूथर किंग नहीं हैं, वे एक व्यापारी हैं। भारत के सत्ताधारी व्यापारियों ने अमेरिका के इस व्यापारी राष्ट्रपति से सौदा कर लिया है। सवाल यह है कि क्या भारत की संप्रभुता की कीमत चुकाई गई है? और किस बदले में? देश को जवाब चाहिए।”