बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। अक्टूबर-नवंबर 2025 में संभावित चुनावों के मद्देनज़र, सभी राजनीतिक दल जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। एनडीए और महागठबंधन की पार्टियां लगातार सर्वे के जरिए वोटरों के रुझान को समझने की कोशिश कर रही हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर रणनीति बनाई जा रही है और मुकाबला बेहद करीबी नजर आ रहा है। इस बार प्रशांत किशोर भी अपनी पार्टी जनसुराज के साथ मैदान में हैं और एक तीसरी ताकत के रूप में उभरते दिख रहे हैं।
चुनावी बिगुल सितंबर में, तैयारियों में जुटे सभी दल
जानकारी के मुताबिक, बिहार में सितंबर महीने में चुनावी बिगुल बजने की संभावना है। ऐसे में सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने स्तर पर चुनावी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब तक कई इंटरनल सर्वे कराए हैं, जिनमें संभावित उम्मीदवारों, सीटिंग विधायकों के परफॉर्मेंस, जातीय समीकरण और सरकार के कामकाज पर वोटरों की राय ली गई है।
इंटरनल सर्वे में एनडीए को मामूली बढ़त
बीजेपी के इंटरनल सर्वे में एनडीए और महागठबंधन के बीच करीबी मुकाबला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, इस समय एनडीए को 42.2% वोट शेयर मिलने की संभावना है, जबकि महागठबंधन को 39.1%। वहीं, प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को 5.2% वोट मिलने का अनुमान है। अन्य दलों के खाते में 13.5% वोट जाते दिख रहे हैं। हालांकि, वोटर लिस्ट में संशोधन के बाद आंकड़ों में थोड़ा फेरबदल संभव है।
जातीय समीकरण: सवर्ण वोट में सेंधमारी, पिछड़ों में एनडीए मजबूत
बीजेपी द्वारा कराए गए जातीय सर्वे में कई दिलचस्प पहलू सामने आए हैं:
सवर्ण वोटर:
- एनडीए – 66%
- महागठबंधन – 13%
- जनसुराज – 10%
- अन्य – 11%
अति पिछड़ा वर्ग:
- एनडीए – 60%
- महागठबंधन – 19%
- जनसुराज – 3%
- अन्य – 18%
महादलित वोटर:
- एनडीए – 40%
- महागठबंधन – 38%
- जनसुराज – 4%
- अन्य – 18%
गैर-यादव पिछड़ा वर्ग:
- एनडीए – 80%
- महागठबंधन – 15%
- जनसुराज – 3%
- अन्य – 2%
पासवान वोटर:
- एनडीए – बहुमत
- महागठबंधन – 22%
- जनसुराज – 3%
यादव वोटर:
- महागठबंधन – 84%
- एनडीए – 12%
- जनसुराज – 2%
- अन्य – 2%
पिछली बार भी कांटे की टक्कर रही थी
2020 के विधानसभा चुनाव में भी एनडीए और महागठबंधन के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ था:
दल वोट प्रतिशत (%)
भाजपा – 19.46%
जदयू – 15.39%
राजद – 23.11%
कांग्रेस – 09.48%
लोजपा – 05.66%
भाकपा माले – लगभग 4%
एआईएमआईएम- 01.24%
बसपा – 01.49%
सीपीआई – 0.83%
माकपा – 0.65%
रालोसपा – 01.77%
राकांपा – 0.23%
नोटा – 01.68%
निष्कर्ष: चुनावी मुकाबला दिलचस्प, जनसुराज का प्रभाव देखना होगा
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार तीन तरफा मुकाबले की स्थिति बन रही है। एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा संघर्ष है, वहीं प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी कुछ खास सीटों पर चुनाव की दिशा बदल सकती है। जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय मुद्दों के आधार पर पार्टियां अपनी रणनीति को धार दे रही हैं। आने वाले दिनों में चुनावी तस्वीर और भी रोचक हो सकती है।