सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला—‘थाने की सफाई’ जैसी जमानत शर्तें रद्द, न्यायपालिका को लगाई कड़ी फटकार

Supreme Court’s Strict Verdict—Bail Conditions Such as ‘Cleaning the Police Station’ Quashed; Judiciary Sternly Reprimanded

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम और सख्त फैसला सुनाते हुए ओडिशा की अदालतों और हाईकोर्ट के उन विवादित आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें आरोपियों को जमानत के बदले ‘पुलिस स्टेशनों की सफाई’ करने की शर्त दी गई थी। कोर्ट ने इन शर्तों को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए तीखी टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने साफ कहा कि इस तरह की शर्तें न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। कोर्ट के इस हस्तक्षेप से दलित और आदिवासी समुदाय के उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो इन अमानवीय शर्तों का सामना कर रहे थे।

क्या था पूरा मामला?
पिछले कुछ महीनों में सामने आई रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ था कि ओडिशा की अदालतें जमानत देते समय अजीबोगरीब शर्तें लगा रही थीं। बीते छह महीनों में ओडिशा हाईकोर्ट ने करीब 50 ऐसे आदेश दिए, जिनमें आरोपियों—खासतौर पर खनन-विरोधी प्रदर्शनों में शामिल दलित और आदिवासी लोगों—को थाने की सफाई करने जैसी शर्तों का सामना करना पड़ा।

कुछ मामलों में तो आरोपियों को दो महीने तक पुलिस थाने की सफाई करने का आदेश दिया गया था। इसी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान पीठ ने ओडिशा न्यायपालिका के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे आदेश कभी संपन्न या प्रभावशाली लोगों के लिए भी दिए जाते हैं?

पीठ ने कहा कि इस तरह की शर्तें न्यायपालिका के भीतर छिपे सामाजिक और जातिगत पूर्वाग्रह की ओर इशारा करती हैं। मुख्य न्यायाधीश ने इसे “क्रूर और घृणित” बताते हुए कहा कि इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

संविधान और समानता पर जोर
कोर्ट ने कहा कि देश आजादी के 76 साल बाद ऐसे दौर में है, जहां न्यायपालिका से समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा की जाती है। ऐसे आदेश न केवल संविधान की भावना के खिलाफ हैं, बल्कि समाज में भेदभाव को भी बढ़ावा देते हैं।

देशभर की अदालतों को चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ऐसी सभी शर्तों को तत्काल प्रभाव से अमान्य घोषित कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि जिन मामलों में ऐसी शर्तें लगाई गई हैं, उन्हें बिना किसी नई अजीब शर्त के हटाया जाए और आरोपियों को जमानत का लाभ मिलता रहे।

इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने देशभर की न्यायपालिकाओं और न्यायिक अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की जातिगत या अपमानजनक शर्तें न लगाई जाएं। कोर्ट ने अपने इस आदेश की प्रति सभी न्यायिक अधिकारियों तक पहुंचाने का भी निर्देश दिया है।

ये खबरें भी अवश्य पढ़े

Leave a Comment