नई दिल्ली: ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर अब समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा चिंताएं तेजी से बढ़ गई हैं। हालिया सैन्य घटनाओं के बाद कई व्यापारिक जहाजों ने अपने निर्धारित मार्ग बदल दिए हैं, जबकि कुछ जहाज सुरक्षित दूरी बनाकर ओमान के समुद्री क्षेत्र की ओर बढ़ गए। इस घटनाक्रम ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक पर नए संकट की आशंका पैदा कर दी है।
समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद कई जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। जहाज संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी आवाजाही पर लगातार नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना संबंधित एजेंसियों को दें। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी अपने जहाजों के लिए वैकल्पिक मार्गों पर विचार शुरू कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल, एलएनजी और अन्य ऊर्जा उत्पाद इसी मार्ग के जरिए एशिया, यूरोप और दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंचते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है।
जहाजों ने बदला रास्ता
हालिया घटनाओं के बाद कई व्यापारिक जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक अपनी गति कम कर दी, जबकि कुछ जहाजों ने संभावित खतरे को देखते हुए ओमान के समुद्री क्षेत्र की ओर रुख किया। समुद्री निगरानी से जुड़े प्लेटफॉर्मों के अनुसार, जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
शिपिंग कंपनियों ने अपने क्रू को विशेष सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। जहाजों को अनावश्यक रूप से संवेदनशील इलाकों में रुकने से बचने और तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया है।
बीमा कंपनियां भी सतर्क
क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर समुद्री बीमा उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध जैसे हालात की आशंका के चलते जहाजों के बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो समुद्री माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने संयम बरतने की अपील की है। कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कई देशों ने अपने नागरिकों को क्षेत्र की यात्रा करने से पहले सुरक्षा सलाह का पालन करने की हिदायत दी है।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद कुछ अंतरराष्ट्रीय मिशनों ने भी अपने कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। जरूरत पड़ने पर सीमित स्तर पर कर्मचारियों की आवाजाही और निकासी की योजना भी तैयार रखी गई है।
वैश्विक बाजारों पर असर
ईरान से जुड़े घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जबकि निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया। विश्लेषकों का कहना है कि यदि समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहती है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
भारत सहित कई एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा होता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा इन देशों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और वैश्विक आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं हुई है। इसलिए तत्काल घबराने जैसी स्थिति नहीं है।
फिलहाल समुद्री सुरक्षा एजेंसियां, अंतरराष्ट्रीय संगठन और संबंधित देश हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो तनाव कम हो सकता है। लेकिन यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं तो समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ईरान, क्षेत्रीय देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच तनाव किस दिशा में जाता है। फिलहाल समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और व्यापारिक जहाज अत्यधिक सतर्कता के साथ अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं।