पटना: बिहार के समस्तीपुर जिले से जुड़े मस्जिद और कब्रिस्तान की जमीन पर हाईवे निर्माण को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब काफी हद तक सुलझ गया है। Patna High Court ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए Bihar State Waqf Tribunal के आदेश को रद्द कर दिया है, जिससे हाईवे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल, वक्फ ट्रिब्यूनल ने पहले इन जमीनों पर अधिग्रहण और निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। ट्रिब्यूनल का तर्क था कि मस्जिद और कब्रिस्तान के रूप में दर्ज जमीनों का अधिग्रहण Waqf Act 1995 के प्रावधानों के अनुसार नहीं किया गया। इस आदेश के चलते परियोजना का काम ठप हो गया था।
इसके बाद National Highways Authority of India (NHAI) ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। NHAI का कहना था कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया National Highways Act 1956 के तहत होती है, जो एक स्वतंत्र और प्रभावी कानून है। ऐसे में वक्फ ट्रिब्यूनल को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Vivek Chaudhary ने स्पष्ट कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल को जमीन अधिग्रहण या निर्माण कार्य पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है, इसलिए उसका आदेश कानून के अनुरूप नहीं है।
हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि National Highways Act 1956 के तहत सार्वजनिक हित में जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है और इसमें Waqf Act 1995 की धारा 91 बाधा नहीं बनती। हालांकि, अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि वक्फ बोर्ड को प्रक्रिया में शामिल कर मुआवजे से जुड़ी जानकारी देना जरूरी होगा।
इस फैसले के बाद लंबे समय से अटका आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट फिर से पटरी पर आ गया है। यह बिहार का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे होगा, जिसकी लंबाई करीब 189 किलोमीटर है। यह एक्सप्रेसवे गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा जैसे प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा।
गौरतलब है कि इस परियोजना के लिए NHAI ने समस्तीपुर के शाहपुर और मोहिउद्दीनपुर क्षेत्रों में जमीन का अधिग्रहण किया था, जिसमें मस्जिद और कब्रिस्तान की जमीन भी शामिल थी। इसी को लेकर विवाद पैदा हुआ था।
अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद परियोजना में आ रही सभी बाधाएं दूर हो गई हैं और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच यात्रा तेज और सुगम होगी, साथ ही व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।