बिहार शिक्षा विभाग में उठे सवाल, क्लीन चिट के बाद भी शिक्षक पर कार्रवाई का मामला

Questions raised in Bihar Education Department regarding action taken against a teacher despite being given a clean chit.

पटना। बिहार के शिक्षा विभाग में एक बार फिर कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की भूमिका पर आरोप लग रहे हैं कि विभागीय संरक्षण में एक ही शिक्षक के खिलाफ बार-बार कार्रवाई की जा रही है। शिक्षक जहां विद्यालय स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं, वहीं पलटकर उन्हीं पर निलंबन की गाज गिराई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय जांच में आरोप निराधार पाए जाने के बावजूद संबंधित शिक्षक को निलंबन से मुक्त नहीं किया गया। अब पीड़ित शिक्षक ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है।

पूर्वी चंपारण के चिरैया प्रखंड से जुड़ा मामला
मामला पूर्वी चंपारण जिले के चिरैया प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, महुआवा के विशिष्ट शिक्षक अभिषेक कुमार पांडेय से जुड़ा है। डीपीओ (स्थापना) ने उन्हें निलंबित करते हुए 6 सितंबर 2025 से विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। इस दौरान माध्यमिक शिक्षा के डीपीओ को संचालन पदाधिकारी तथा चिरैया प्रखंड के बीईओ को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था।

गाली-गलौज का आरोप नहीं हो सका साबित
निलंबित शिक्षक पर प्रधानाध्यापक से गाली-गलौज करने का आरोप लगाया गया था। शिक्षक ने अपने जवाब में आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन बताया। जांच अधिकारी ने प्रतिवेदन में उल्लेख किया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और आरोपित शिक्षक के बयानों की समीक्षा के बाद ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।

अन्य आरोपों के भी नहीं मिले प्रमाण
जांच में शिक्षक पर लगाए गए अन्य आरोपों—विद्यालय में शिक्षक आचरण के विरुद्ध कार्य करने और शिक्षण कार्य को प्रभावित करने—के संबंध में भी बीईओ व उपस्थापन पदाधिकारी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच अधिकारी के अनुसार, तीनों आरोप प्रमाण के अभाव में खारिज कर दिए गए।

आपसी विवाद से प्रेरित पाए गए आरोप
जांच अधिकारी सह डीपीओ माध्यमिक शिक्षा ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि शिक्षक पर लगाए गए आरोप प्रधानाध्यापक और बीईओ के साथ आपसी विवाद व मतभेद का परिणाम प्रतीत होते हैं। संबंधित प्रधानाध्यापक और बीईओ से पूछताछ व पत्राचार के बावजूद संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि आरोप संख्या 1, 2 और 3 प्रमाणित नहीं हो पाए हैं।

क्लीन चिट के बावजूद दोबारा जांच के आदेश
हैरत की बात यह है कि जांच रिपोर्ट में क्लीन चिट मिलने के बाद भी पूर्वी चंपारण के डीईओ और डीपीओ (स्थापना) इससे संतुष्ट नहीं हुए। 13 जनवरी 2026 को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा को पत्र लिखकर शिक्षक अभिषेक कुमार पांडेय के खिलाफ आरोपों की पुनः जांच के निर्देश दिए गए। पत्र में ई-शिक्षा कोष में कूट रचना कर उपस्थिति दर्ज करने और शिक्षक आचरण के विरुद्ध कार्य करने जैसे नए आरोपों की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद डीपीओ माध्यमिक शिक्षा ने शिक्षक से स्पष्टीकरण भी तलब किया है।

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं और अब देखना होगा कि पीड़ित शिक्षक को प्रशासन से न्याय मिल पाता है या नहीं।

ये खबरें भी अवश्य पढ़े

Leave a Comment