नई दिल्ली- Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी से जुड़े 7 नवंबर 2025 के अपने आदेश में बदलाव या उसे वापस लेने की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। साथ ही अदालत ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) की ओर से जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी निरस्त कर दीं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में कुत्ते लाइलाज रूप से बीमार हों, रेबीज से संक्रमित हों या स्पष्ट रूप से आक्रामक और खतरनाक हों, वहां मानव जीवन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पशु जन्म नियंत्रण नियमों और अन्य वैधानिक प्रोटोकॉल के तहत उन्हें मारने पर विचार किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट के निर्देशों को लागू करने वाले अधिकारियों को सद्भावना के साथ किए गए सरकारी कार्यों के लिए कानूनी सुरक्षा मिलेगी। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की एफआईआर या आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।
शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वे इस मामले में स्वतः संज्ञान लें और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करें। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार निर्देशों में जरूरी संशोधन या विस्तार कर सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मूल भावना और उद्देश्य को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
जस्टिस Vikram Nath, जस्टिस Sandeep Mehta और जस्टिस N. V. Anjaria की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने स्कूल-कॉलेजों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, खेल परिसर और अस्पताल जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पुराने निर्देशों में बदलाव से इनकार कर दिया। साथ ही नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर वापस छोड़ने की मांग भी अस्वीकार कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि देश के हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह से कार्यरत एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर स्थापित किया जाए। इन केंद्रों में आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्जिकल सुविधाएं और सहायक लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराए जाएंगे तथा कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।