नई दिल्ली: बिहार की वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि जिन लोगों के नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनकी सूची चार सप्ताह के भीतर गृह मंत्रालय को भेजी जाए, ताकि नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत आगे की कार्रवाई की जा सके।
चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि:
- संदिग्ध नागरिकता के आधार पर हटाए गए नामों की सूची 4 सप्ताह के भीतर गृह मंत्रालय को सौंपी जाए।
- संबंधित सक्षम प्राधिकारी कानून के मुताबिक नागरिकता पर फैसला करेगा।
- फैसला लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनावों से पहले किया जाना बेहतर होगा।
- जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा।
- जांच में भारतीय नागरिक पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति का नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ा जाएगा।
23 साल बाद हो रही प्रक्रिया को SC ने बताया जरूरी
बिहार में वोटर लिस्ट के SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया करीब 23 साल बाद की जा रही है और इसका मकसद वोटर लिस्ट में मौजूद गंभीर विसंगतियों को दूर करना है।
अदालत ने माना कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा उपाय रखे गए हैं, इसलिए इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता।
दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल खारिज
वोटर सत्यापन के दौरान मांगे जा रहे दस्तावेजों पर उठे सवालों को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दस्तावेजों का वर्गीकरण स्पष्ट और तार्किक आधार पर किया गया है, जिसका उद्देश्य वोटर लिस्ट की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना है।
हालांकि अदालत ने चुनाव आयोग को यह भी नसीहत दी कि पहले से दर्ज वोटरों के नामों के साथ लापरवाही या हल्के तरीके से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। किसी भी संशोधन की प्रक्रिया कानून के तय नियमों के तहत ही पूरी की जानी चाहिए।
‘लोकतंत्र सिर्फ वोटिंग नहीं, मतदाताओं की पहचान भी जरूरी’
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान कराने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह तय करना भी जरूरी है कि वोट देने का अधिकार किन लोगों को प्राप्त है।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां:
- “वैधता की धारणा बेहद महत्वपूर्ण है।”
- बिना ठोस आधार और उचित प्रक्रिया के वोटर लिस्ट से नाम नहीं हटाए जाने चाहिए।
- वोटर लिस्ट किसी भी राजनीतिक समुदाय का कानूनी रिकॉर्ड होती है।
- इससे जुड़े विवाद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रतिनिधि सरकार की बुनियाद से जुड़े होते हैं।
चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान राजनीतिक वैज्ञानिक बर्नार्ड मैनिन का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी प्रतिनिधि सरकार के लिए वोटों की गिनती से पहले यह तय करना जरूरी है कि वोट देने का अधिकार किन लोगों के पास है।