नई दिल्ली: लिव-इन रिलेशनशिप और उसमें सहमति से बने शारीरिक संबंधों को लेकर Supreme Court of India ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कपल बिना शादी के अपनी मर्जी से लंबे समय तक साथ रहता है और बाद में उनका रिश्ता खत्म हो जाता है, तो इसे रेप का मामला नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी Justice B. V. Nagarathna की बेंच ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक महिला ने शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगाया था। मामले…
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पितृत्व अवकाश पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, केंद्र से कानून बनाने पर विचार करने को कहा
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पितृत्व अवकाश (पैटरनिटी लीव) को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से इसे सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे के विकास में मां के साथ-साथ पिता की भूमिका भी समान रूप से अहम होती है। यह टिप्पणी जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की। मामला उस नियम से जुड़ा था, जिसमें गोद लेने वाली मां को…
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