वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 देशों को निर्यात पर टैरिफ लगाने से संबंधित पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ये पत्र सोमवार को भेजे जाएंगे, और उस दिन ही प्रभावित देशों के नामों का खुलासा किया जाएगा।
मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा,
“मैंने कुछ पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग टैरिफ तय किए गए हैं। पत्र भेजना ज्यादा प्रभावी तरीका है।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ देशों पर 70% तक ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लगाया जा सकता है, जिसे 1 अगस्त से लागू किया जा सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नहीं बन पाई सहमति
इस बीच, भारत का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जो 26 जून से 2 जुलाई तक वाशिंगटन में था, किसी अंतिम व्यापार समझौते के बिना वापस लौट आया। इस दल का नेतृत्व भारत सरकार के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल कर रहे थे।
बातचीत में अमेरिका ने भारत से अपने एग्रीकल्चर और डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए बड़ा बाजार खोलने की मांग की, लेकिन भारत ने इसे अपने छोटे किसानों की आजीविका से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताते हुए फिलहाल कोई रियायत नहीं दी।
हालांकि अब भी उम्मीद जताई जा रही है कि 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले दोनों देशों के उच्च राजनीतिक स्तर पर एक अंतरिम व्यापार समझौता संभव हो सकता है।
भारत का रुख – “डेडलाइन के दबाव में नहीं करेंगे समझौता”
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया,
“भारत कभी भी डेडलाइन के दबाव में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर नहीं करता है।”
भारत फिलहाल अमेरिका से यह उम्मीद कर रहा है कि अगर कोई अंतरिम समझौता हो जाता है, तो उसे टेक्सटाइल, लेदर और फुटवियर जैसे लेबर-इंटेंसिव क्षेत्रों में टैरिफ रियायतें मिल सकती हैं और वह राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित 26% टैरिफ से छूट पा सकता है।
व्यापार तनाव बरकरार
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने यूनाइटेड किंगडम और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते कर लिए हैं, जिससे साफ है कि वह चुनिंदा देशों के साथ द्विपक्षीय टैरिफ स्ट्रक्चर पर आक्रामक नीति अपना रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में फिलहाल नरमी के संकेत कम हैं, लेकिन राजनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप से आखिरी समय में कोई अंतरिम समाधान निकलने की संभावना बनी हुई है।