प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के दस साल पूरे, सूक्ष्म उद्यमिता को मिली नई दिशा

Pradhan Mantri Mudra Yojana (PMMY) completes ten years, micro entrepreneurship gets a new direction

नई दिल्ली: देश की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के दस साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड (मुद्रा) के तहत पीएमएमवाई की स्थापना सूक्ष्म इकाइयों से संबंधित विकास और पुनर्वित्त गतिविधियों के लिए की गई थी।

अप्रैल 2015 में लॉन्च होने के बाद से, पीएमएमवाई ने 32.61 लाख करोड़ रुपये के 52 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत किए हैं, जिससे देशभर में उद्यमिता क्रांति को बढ़ावा मिला है। अब व्यापार वृद्धि केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों और गांवों तक फैल चुकी है, जहां पहली बार लोग अपने उद्यम चला रहे हैं। यह मानसिकता में बदलाव का संकेत है, क्योंकि अब लोग नौकरी चाहने वाले नहीं रहे, वे अब नौकरी देने वाले बन रहे हैं।

यह योजना यह सुनिश्चित करती है कि सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) जैसे कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) द्वारा बिना किसी गिरवी रखे 20 लाख रुपये तक का संस्थागत कर्ज प्रदान किया जाए।

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुद्रा योजना ने जमीनी स्तर पर उद्यमिता के एक नए युग की नींव रखी है। सिलाई इकाइयों, चाय की दुकानों, सैलून, मैकेनिक की दुकानों और मोबाइल मरम्मत व्यवसायों जैसे लाखों सूक्ष्म उद्यमियों ने आत्मविश्वास से कदम बढ़ाया है।

पीएमएमवाई ने गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को संस्थागत ऋण प्रदान कर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते हुए उद्यमों का समर्थन किया है।

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके लाभार्थियों में 68 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो इस योजना की महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

वित्तीय वर्ष 2016 से 2025 तक, प्रति महिला पीएमएमवाई वितरण राशि 13 प्रतिशत की सीएजीआर (संपूर्ण वार्षिक वृद्धि दर) से बढ़कर 62,679 रुपये पर पहुंच गई, जबकि प्रति महिला वृद्धिशील जमा राशि 14 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 95,269 रुपये हो गई।

जिन राज्यों में महिलाओं को अधिक ऋण दिया गया है, वहां महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे छोटे व्यवसायों (एमएसएमई) के जरिए रोजगार सृजन में काफी वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि महिलाओं को लक्षित करके वित्तीय सहायता प्रदान करना उनकी आर्थिक स्थिति और कार्य क्षमता में प्रभावी सुधार करता है।

इस योजना ने पारंपरिक ऋण बाधाओं को तोड़ने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 50 प्रतिशत मुद्रा खाते एससी, एसटी और ओबीसी उद्यमियों के पास हैं, जिससे औपचारिक वित्त तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होती है।

इसके अतिरिक्त, मुद्रा ऋण धारकों में से 11 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदायों से हैं, जो इस योजना के समावेशी विकास में योगदान को दर्शाता है। यह योजना हाशिए पर पड़े समुदायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनने का अवसर प्रदान कर रही है।

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