बिहार में लूट की छूट थी।
बिहार में भ्रष्टाचार शिष्टाचार में बदल गया।
अब अंत ऐसा कि कोई जान भी न पाएगा ऐसा नया नहीं कब उदाहरण है।
नीतीश कुमार कुछ जाति के लिए किय और जाति के नेताओं को समाप्त किया।
दुनिया में जितने यशस्वी राजनेता हुए हैं । चाहे वह हिटलर या शाहजहां क्यों नहीं हों। उनका अंत बहुत दुखदाई हुआ है। हिटलर दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह माना जाता रहा और शाहजहां मुगल काल के स्वर्ण काल के बादशाह रहे। पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद वर्तमान भारत में अटल बिहारी वाजपेयी देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री रहे लेकिन उनका अंत काल इस अज्ञातवास में बीता। यह राजनीति के जानकार अच्छी तरह से जानते हैं। यही समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का हुआ। अब चर्चा है कि अब जिंदगी की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी होगी। वर्तमान में उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक लगभग अज्ञातवास में ही अपने जिंदगी का से शेष गुजर रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो अगले दिन के बाद पूर्व हो जाएंगे। सत्ता सुख सुविधा कम हो जायेगी लेकिन सुरक्षा जेट सिक्योरिटी की होगी और कुछ अधिकारी भी देख रेख के नाम पर निगरानी के लिए होंगे।
यह सच है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दरबार लालू प्रसाद यादव की तरह या जॉर्ज फर्नांडीज की तरह सबके लिए खुला हुआ नहीं था। फिर भी रोज भूंजा पार्टी होती थी। वही भूंजा पार्टी जिसने उनके 20 साल के स्वर्ण युग के अंत की इबादत लिख दी है। आज कुछ राजनेताओं का चरित्र एक ऐसे जल्लाद जमींदार के रूप में दिख रहा है। जो आज से 70- 75 साल पहले दिखता था। जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कैद में दिख रहे हैं। कुछ खास लोग जहां चाहते हैं वहां ले जाते हैं। यहां हस्ताक्षर करने के लिए बोलते हैं। वहां उन्हें हस्ताक्षर करना होता है। क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना है। किस से मिलना है किस से नहीं मिलना है। सब वही तय करते हैं। यह पूरी दुनिया देख रही है। ऐसे में आप आने वाले समय की कल्पना स्वयं कर सकते हैं। वह दिल्ली में रहें या पटना में रहें। उन्हें कैद में रखने की पूरी तैयारी है। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के मौके पर जिस तरह से जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने जो व्यवहार किया। उसकी तुलना औरंगजेब से हो या किसी और से किया जाए। बिहार में समाजवाद के साथ-साथ नीतीश कुमार का अंत इतना बुरा होगा और अपने लोग इस तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने के लिए कठोर व्यवहार करेंगे। इसकी कल्पना आम लोगों को नहीं थी। ऐसे मुख्यमंत्री जिस चांडाल चौकड़ी से घिर गए थे। इसमें इसका अंदेशा दिखने लगा था।
नीतीश कुमार के कार्यकाल में लाल फीताशाही हावी रहा। कई ब्यूरोक्रेट की संपत्ति राज्य सरकार के बजट से भी ज्यादा अकूत संपत्ति बनाकर विदेश में रखे हैं। अब तो भागजाने की तैयारी भी हो रही है। नीरव मोदी एवं विजय माल्या की तरह। भ्रष्टाचार चरम सीमा पार कर चुकी है। एक छोटा उदाहरण बांका जिला के नगर पंचायत, बौनसी प्रखंड में दो सौ 200/मीटर लोहे का कटीले तार की खरीद ₹ 2,26,64,500.00 (2 करोड़ 26 लाख 64500) संवेदक को भुगतान किया गया अर्थात एक मीटर लोहे का कटीलेतार की खरीदारी एक लाख तीन हजार पांच सौ रूपये (1,03,500.00) जबकि अत्यधिक बाजार कीमत पचास रुपए/मीटर से ज्यादा नहीं होगी? वही 20 फिट पाईप झंडोंतोलन हेतु खरीदा गया एक पाइप 12 लाख 28 हजार रुपया में। हजारों का माल करोड़ों में खरीद की जा रही है। ऐसे अनगिनत उदाहरण है। इसे कहा जा सकता है लूट की छूट बिहार में है। भ्रष्टाचार ही अब शिष्टाचार हो चुकी है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कोई तवज्जो नहीं है।
नीतीश कुमार जी का इतना प्रभाव था कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी राज्य का राज्यपाल जैसे विशिष्ट पदों पर विराजमान करा सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं किया। ऐसा इसलिए अपने से आगे किसी को देखना पसंद नहीं था। पार्टी के अंदर भी तेज तरार नेताओं व कार्यकर्ताओं को दरकिनार करते रहे हैं। खासकर कुर्मी जाति के नेताओं को तो खत्म ही कर दिया। किसी ने ठीक कहा है कि ऐसा कोई सगा नहीं जिसे नीतीश कुमार जी ने ठगा नहीं है। दर्जनों उदाहरण है, उदाहरण देने की जरूरत नहीं है, यह सर्वविदित है।
— चंद्रमणि कुमार मणि
बेवाक लेखक
पटना,बिहार